हिंदी विभाग में इंटर्नशिप कार्यक्रम का सफल आयोजन
26 नवंबर 2025, केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय, पेरिया के हिंदी एवं तुलनात्मक साहित्य विभाग में महात्मा गांधी गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज, माहे के बी.ए. हिंदी तृतीय वर्ष के 10 विद्यार्थियों के लिए 28 अक्टूबर 2025 से 26 नवंबर 2025 तक एक-माह का इंटर्नशिप कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। यह इंटर्नशिप कार्यक्रम विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण, व्याकरण के गहन अध्ययन तथा उच्च शिक्षा की शैक्षणिक प्रक्रियाओं से परिचित कराने के उद्देश्य से विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया था।
प्रतिभागी विद्यार्थी एवं अनुमति
महात्मा गांधी गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज, माहे के प्राचार्य डॉ.
के.के. शिवदासन द्वारा जारी मेमोरेंडम (दिनांक 28.10.2025) के
माध्यम से तीसरे वर्ष बी.ए. हिंदी के निम्न 10 विद्यार्थियों को केरल केंद्रीय
विश्वविद्यालय, हिंदी एवं तुलनात्मक साहित्य विभाग में
इंटर्नशिप के लिए औपचारिक अनुमति प्रदान की गई:
Abhay
Krishna E, Adithya C S, Aromal V M, Fathimath Nasifa M P, Hridya T V, Nihala
Parvin Naseer N, Pranav K, Sandra Sajeev P, Vaishnavi T तथा Vismaya
A V।
हिंदी एवं तुलनात्मक साहित्य विभाग द्वारा संचालित इस इंटर्नशिप के दौरान विद्यार्थियों को हिंदी व्याकरण, तुलनात्मक व्याकरण (मलयालम–हिंदी) तथा भाषा-प्रयोग के व्यावहारिक आयामों पर केंद्रित प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को कक्षा आधारित शिक्षण, अभ्यास आधारित अधिगम तथा व्यावहारिक वार्तालाप के माध्यम से भाषा की संरचना और सूक्ष्मताओं से परिचित कराना था। पूरे एक महीने तक नियमित सत्रों, अभ्यास-पत्रों और संवादात्मक कक्षाओं के माध्यम से विद्यार्थियों की भाषा-दक्षता, विश्लेषण-क्षमता और भाषागत अनुशासन को विकसित करने पर बल दिया गया।
मार्गदर्शक शिक्षक एवं शोधार्थियों की
भूमिका
इंटर्नशिप कार्यक्रम विभागाध्यक्ष प्रो.
(डॉ.) मनु के नेतृत्व में संचालित हुआ,
जिन्होंने संपूर्ण कार्यक्रम की रूपरेखा, निगरानी
और शैक्षणिक गुणवत्ता की जिम्मेदारी संभाली। विभाग के वरिष्ठ आचार्य प्रो. (डॉ.)
तारु एस. पवार और सहायक आचार्य डॉ. राम बिनोद रे ने विभिन्न व्याख्यानों, व्याकरण-आधारित सत्रों और तुलनात्मक अध्ययन की कक्षाओं के माध्यम से
विद्यार्थियों को मार्गदर्शन दिया। शोधार्थी धनराज, शेफाली
राय और अदित्य ने इंटर्नशिप के बच्चों के साथ अपने अनुभवों
को साझा किया जिसमें उन्होने छात्रों को शोध-प्रक्रिया एवं समसामयिक हिंदी मुद्दों
पर व्याख्यान दिए। व्यावहारिक
अभ्यास, चर्चा-सत्रों तथा शैक्षणिक
सहयोग के माध्यम से विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की, जिससे कार्यक्रम अधिक सहभागितापूर्ण और परिणाममुखी बन सका।
विभागाध्यक्ष प्रो.(डॉ.) मनु ने हिंदी और अंग्रेजी व्याकरण में काल की भूमिका और उनका तुलनात्मक विश्लेषण किया। कहानियों का आपने अनुवाद करते हुए मलयालम से हिंदी कहानी जैसे ‘ड्रोन’, ‘पोस्टमैन’, ‘सूरज करीब था’ आदि का मूल्यांकन करते हुए उनके तुलनात्मक स्वरूप को उजागर किया। तथा अनुवाद में उनके स्वरूप को स्पष्ट करते हुए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तरीके से और उससे उठने वाले अर्थ भेदक रूप को प्रस्तुत करने का कार्य किया।
वरिष्ठ आचार्य प्रो.(डॉ.) तारु एस. पवार ने अनुवाद के सिद्धान्त पर बहुत रोचक और व्यवस्थित तरीके से
पढ़ाया। अनुवाद की परिभाषा और स्वरूप तथा अनुवादक की भूमिका पर विशेष दृष्टिकोण
रखा। इस ढांचे से छात्रों को न सिर्फ सिद्धांत पता चलता है, बल्कि यह भी समझ आता है कि हर अनुवाद के पीछे
कोई न कोई सैद्धांतिक स्थिति जरूर होती है।
सहायक आचार्य डॉ. राम
बिनोद रे ने अपनी कक्षा में बच्चों से अनुवाद का
विश्लेषण सोपान की बात करते हुए बांग्ला, हिंदी
और अंग्रेजी सूत्र जोड़ने की कोशिश की। भाषा संप्रेषण के आधार पर किस रूप में
अनुवाद की भूमिका रहती है और उसका विश्लेषणात्मक पुनर्विन्यास का प्रयोग अनुवाद
में कैसे होता है उसकी ओर दृष्टि ले जाने का प्रयास किया।
शोधार्थी धनराज
ने छात्रों से हिन्दी साहित्य अध्ययन के दौरान आने वाली समस्याओं पर चर्चा की ।
मुंशी प्रेमचंद व उनकी कहानी ‘नमक का दरोगा’ के माध्यम से उनकी समस्या को जाना तथा समस्या समाधान पर चिंतन हुआ। और
भविष्य में पी.जी तथा यू.जी.सी NET परीक्षा में सफलता कैसे
प्राप्त करें इस पर भी चर्चा-परिचर्चा किया गया।
शोधार्थी शेफाली राय
ने हिन्दी की शब्दावली को याद रखने से जुड़ी समस्याओं के समाधान रूप में
अन्त्याक्षरी, फिल्म के अभ्यास की महत्ता को बताते हुए, अनुवाद के तत्काल अवलोकन के आधार पर विद्यार्थियों के बीच कारक के प्रयोग को बताया।
शोधार्थी आदित्य
द्वारा हिंदी बोलने की शुद्धता, उच्चारण, स्वर और व्यंजन ध्वनियों के सही प्रयोग पर विस्तृत अभ्यास कराया गया। वाक्य-विन्यास,
शब्द-चयन और लिंग-वचन की शुद्धता पर ध्यान केंद्रित किया गया। विद्यार्थियों
को यह समझाया गया कि संवाद केवल बोलने का नहीं, बल्कि सुनने,
समझने और प्रतिक्रिया देने की प्रक्रिया है। विद्यार्थियों को अपने
विचारों को तार्किक, संतुलित और आत्मविश्वासपूर्वक प्रस्तुत
करने के व्यावहारिक अभ्यास कराए गए।
कार्यक्रम का समापन एवं प्रभाव
26 नवंबर 2025 को केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा ‘Certificate of Internship Completion’ प्रदान किए गए, जिनमें यह प्रमाणित किया गया कि सभी 10 विद्यार्थियों ने निर्धारित अवधि में इंटर्नशिप सफलतापूर्वक पूर्ण की और उनका आचरण संतोषजनक रहा। छात्रों को हिंदी व्याकरण और तुलनात्मक व्याकरण में प्राप्त व्यावहारिक अनुभव उनके आगे के उच्च अध्ययन और व्यावसायिक जीवन में सहायक होगा, तथा यह कार्यक्रम दोनों संस्थाओं के बीच शैक्षणिक सहयोग की एक सार्थक पहल के रूप में स्थापित हुआ।
इस सत्र का प्रमुख
उद्देश्य विद्यार्थियों में प्रभावी हिंदी संप्रेषण कौशल का विकास करना था,
ताकि वे व्यावसायिक और सामाजिक दोनों परिवेशों में आत्मविश्वास के
साथ स्वयं को स्पष्ट, शुद्ध और प्रभावशाली रूप से अभिव्यक्त
कर सकें।
रिपोर्ट लेखन
डॉ. राम बिनोद रे, प्रदुन कुमार
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