हिन्दी को भारतीय भाषाओं के साथ जोड़ने की जरूरत- डॉ. जयप्रकाश कर्दम

10 जनवरी 2023 
कार्यक्रम का उदघाटन करते केरल केन्द्रीय विश्ववविद्यालय के कुलसचिव डॉ. मुरलीधरन नम्बियार तथा अन्य विभागीय शिक्षक

कार्यक्रम का उदघाटन भाषण देते केरल केन्द्रीय विश्ववविद्यालय के कुलसचिव डॉ. मुरलीधरन नम्बियार

अध्यक्षीय वक्तव्य देते हिन्दी विभाग के अध्यक्ष प्रो. मनु


10 जनवरी 2023,  केरल केन्दीय विश्वविद्यालय के हिंदी एवं तुलनात्मक साहित्य विभाग में ''विश्व हिंदी दिवस'' का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ विश्वविद्यालयी कुलगीत गायन से हुआ। विभागाध्यक्ष प्रो. मनु ने उपस्थित सभी विद्वतजनों का स्वागत करते हुए अध्यक्षीय भाषण दिया, जिसमें उन्होंने बताया कि “मलयालम भाषा का भविष्य मलयालम भाषा का अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों के हाथ में है वैसे ही हिंदी का भविष्य हिंदी के विद्यार्थियों पर निर्भर है।” तत्पश्चात विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. एम. मुरलीधरन नम्बियार ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित प्रथम ‘विश्व हिंदी दिवस’ का उल्लेख करते हुए ‘विश्व हिंदी दिवस’ के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उसके वाद विश्वविद्यालय के हिंदी अधिकारी डॉ. अनीश कुमार टी.के. को आशीर्वचन के लिए आमंत्रित किया गया। शोधार्थी रोहित जैन ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं आलोचक डॉ. जयप्रकाश कर्दम जी का परिचय देते हुए वक्तव्य के लिए आमंत्रित किया। डॉ. जयप्रकाश कर्दम ने अपने वक्तव्य में “हिंदी भाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए वैश्विक स्तर पर हिंदी की स्थिति और भारतवासियों के मन में अंग्रेजी की तुलना में हिंदी के स्थान को रेखांकित किया। वे आगे कहते हैं कि व्यापार हेतु विदेशियों द्वारा अंग्रेजी जानना ही भारत के लिए काफी है, विदेशियों की इस सोच को बदलने की आवश्यकता है”। उन्होंने हिंदी के विकास में ‘सबका साथ सबका विकास’ को चरितार्थ किया। कार्यक्रम के संयोजक हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. राम विनोद रे ने धन्यवाद ज्ञापित किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम के समापन की घोषणा हुई। कार्यक्रम का संचालन शोधछात्रा प्रिया कुमारी ने किया।

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